नए भारत में आर्थिक विकास एवं निवेश के लिए कैपिटल मार्केट (Capital Market) लोकप्रिय होता जा रहा है। लंबी अवधि (Long Term) के लिए किया गया यह निवेश, निवेशक को आर्थिक मजबूती के साथ-साथ अच्छे रिटर्न का भरोसा भी देता है ।
यह भारतीय वित्तीय बाजार (Indian Financial Market) का एक प्रकार है। इसके अंतर्गत विभिन्न उपकरण (Capital Market Instruments), भारत में प्रचलित है। सरकार और कम्पनियां इन्हीं उपकरणों (Instruments) के माध्यम से निवेशकों से पूंजी प्राप्त करती है।
यदि आप भी निवेश में रुचि रखते है तो, यह लेख आपके लिए ही है । इसमें आपको Top 5 Best Capital Market Instruments के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी ।
पूंजी बाजार (Capital Market) क्या है?
भारतीय वित्तीय बाजार दो प्रकार से विभाजित होता है | पहला मुद्रा बाजार (Money Market) है जिसमे धन का लेन-देन बहुत कम अवधि (1 दिन से 1 वर्ष तक) के लिए होता है | इसे “अल्पकालिक ऋण बाजार” भी कहते है | दूसरा बाजार, पूंजी बाजार (Capital Market) होता है |
पूंजी बाजार (Capital Market) वह वित्तीय बाजार होता है, जिसमे धन का लेन-देन लम्बी अवधि (Long Term) के लिए होता है | यह अवधि 1 वर्ष से अधिक की होती है | यदि किसी सरकार अथवा कंपनी को एक साल से ज्यादा समय (जैसे 5, 10 या 20 साल) के लिए फण्ड चाहिए, तो वह कैपिटल मार्किट की ओर रुख करता है |
पूंजी बाजार का मुख्य कार्य एवं उद्धेश्य :
पूंजी बाजार (Capital Market) का मुख्य कार्य, निवेशकों से फण्ड जुटाकर कंपनी या सरकार को प्रदान करना है | इससे भारत के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है, बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलती है | इसके अलावा दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा मिलता है, जिससे वित्तीय बाजार में तरलता (Liquidity)आती है| प्रतिभूतियों (Securities) का मूल्य निर्धारण होता है |
Capital Market Instruments क्या है?
Capital Market Instruments वे उपकरण होते है, जिनके जरिये पूंजी बाजार (Capital Market) में निवेश किया जाता है | इनकी अवधि 1 वर्ष से अधिक (Long Term) के लिए होती है | इन उपकरणों (Instruments) में इक्विटी शेयर, प्रेफेरेंस शेयर, डिबेंचर/बॉन्ड, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF), म्युचुअल फण्ड आदि आते है |
Top 5 Best Indian Capital Market Instruments
1. इक्विटी शेयर (Equity Share) :
इक्विटी शेयर, कंपनी में एक आंशिक-स्वामित्व रखता है| निवेशक को इसके अंतर्गत निवेश करने पर लाभांश/डिविडेंड (Dividend) और पूंजी लाभ प्राप्त होता हैI इसके अंतर्गत, जोखिम अधिक होता है, परन्तु रिटर्न भी अच्छा मिल सकता है l
निवेशक को निवेश करते समय, कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति, कंपनी ग्रोथ और मार्केट ट्रेंड को जरूर चेक करना चाहिए l
2. प्रीफरेंस शेयर (Preference Share)
इसके अंतर्गत निवेश करने वाले निवेशको को इक्विटी शेयरधारकों कि तुलना में कुछ विशेष वरीयता या प्राथमिकता (Preference) प्राप्त होती है | जैसे डिविडेंड (Dividend) और पूंजी वापसी में प्रीफरेंस शेयरधारकों को पहले प्राथमिकता दी जाती है |
Preference Shares की मुख्य विशेषताएँ:
- डिविडेंड में प्राथमिकता : कंपनी के लाभ का लाभांश प्रीफरेंस शेयरधारको को पहले मिलता है, बाद में इक्विटी शेयरधारकों को मिलता है |
- पूंजी की वापसी (Repayment of Capital) : कंपनी के बंद हो जाने पर (जिसे Liquidation कहते है), कंपनी अपनी सम्पत्ति बेचती है| सम्पति बेचने से प्राप्त धन, सबसे पहले कर्जदाताओ को, फिर प्रीफरेंस शेयरधारको को लौटाया जाता है | इसके बाद ही बचे हुए धन को इक्विटी शेयरधारकों में बाँटा जा सकता है |
- निश्चित आय (Fixed Income) : इसके अंतर्गत डिविडेंड पहले से ही तय होता है (जैसे 10% Preference Shares)| बाजार अस्थिरता से इनके डिविडेंड पर कोई असर नहीं होता | यह बॉन्ड के सामान पूरी तरह से गारंटीड नहीं होते, परन्तु इक्विटी शेयर की तुलना में ज्यादा स्थिर होते है।
- वोटिंग राइट्स (Voting Rights) : कुछ मामलों में उन्हें वोटिंग राइट, प्रीफरेंस शेयरधारको को प्राप्त नहीं होते | परन्तु कुछ परिस्थितियों में वोटिंग राइट्स मिलते है जैसे- कंपनी ने कई साल से डिविडेंड नहीं दिया हो |
3. डिबेंचर (Debentures)
यह एक कर्ज का सर्टिफिकेट की तरह कार्य करता है| जब किसी कंपनी को फण्ड की आवश्यकता होती है, परन्तु वह शेयर बेचकर कंपनी का मालिकाना हक नहीं बाँटना चाहती या फिर बैंक से ऋण (loan) नहीं लेती | तब वह जनता है उधार लेती है | बदले में इसके, कंपनी एक लिखित दस्तावेज प्रदान करती है, जिसे डिबेंचर (Debentures) कहा जाता है|
Debentures की मुख्य विशेषताएं:
- निश्चित ब्याज (Fixed Interest) : इसके अंतर्गत ब्याज दर निश्चित होती, जिसे कूपन रेट कहा जाता है। कंपनी के लाभ-हानि, ब्याज दर पर कोई फर्क नहीं पड़ता | उसे ब्याज दर के अनुसार ब्याज देना ही पड़ता है |
- प्राथमिकता (Priority) : कंपनी के बंद होने पर सम्पति बेचने से प्राप्त धन को सबसे पहले डिबेंचर धारकों को लौटाया जाता है, क्योंकि वे कर्जदाता होते है |
- शेयर की तुलना में कम जोखिम होता है, परन्तु रिटर्न भी कम मिलता है |
- कर्जदाताओं का कंपनी में कोई मालिकाना हक नहीं होता, इसलिए उन्हें वोटिंग राइट्स भी नही मिलते |
4. बॉन्ड (Bonds)
Bonds सरकार या बड़ी कंपनियों द्वारा जारी किए हुए सबसे सुरक्षित capital market instruments माने जाते है | जब हम सरकार या कंपनी को एक निश्चित अवधि के लिए कर्ज देते है, तब उस समझौते को बॉन्ड (Bond) कहते है | यह लगभग डिबेंचर जैसा ही कार्य करता है, बस इसका उपयोग सरकारी प्रतिभूतियों हेतु ज्यादा होता है|
Bonds की विशेषताएं :
- निश्चित समय के लिए निवेश
- नियमित आय
- स्टॉक मार्केट की तुलना में बॉन्ड्स सुरक्षित माने जाते है|
- यदि महंगाई दर Inflation rate, बॉन्ड के ब्याज से ज्यादा हो जाती है, तब वास्तविक कमाई कम ही हुई |
5. म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) :
वर्तमान में Mutual Funds (म्यूचुअल फंड) को सबसे लोकप्रिय capital market instruments माना जा रहा है | निवेश का वह माध्यम है, जिसमें बहुत सारे निवेशक मिलकर एक जगह पैसा जमा करते है| इस जमा किए गए पैसे को एक प्रोफेशनल फण्ड मैनेजर संभालता है और इसे अपनी विशेषज्ञता अनुसार शेयर बाजार, बॉन्ड्स या अन्य संपत्तियों में निवेश करता है। सभी निवेशकों में लाभ-हानि का प्रतिशत, उनके निवेश किये हुए धन प्रतिशत के अनुसार बाँटा जाता है |
Mutual Funds की विशेषताएं :
- एकत्रित फण्ड को फण्ड मैनेजर द्वारा मैनेज किया जाता है | फण्ड मैनेजर, बाजार को अच्छे से समझने वाला होता है| वह यह निर्णय लेता है कि बाजार के किस सेक्टर में निवेश किया जाए ताकि निवेशकों का अधिक से अधिक लाभ हो |
- इसमें, SIP (Systematic Investment Plan) के माध्यम से छोटे-छोटे निवेश भी संभव हो पाते है |
- विविधीकरण (Diversification): निवेश की हुई राशी, भिन्न-भिन्न कंपनी में लगती है, जिससे जोखिम कम हो जाता है|
- इसके अलावा हम जब चाहें, हमारा पैसा निकाल सकते है |
Capital Market Instruments में निवेश के फायदे
- Long-Term Gains : पूंजी बाजार (Capital Market) में लंबी अवधि में किया निवेश, ज्यादा अच्छा लाभ दे सकता है |
- पोर्टफोलियो विविधीकरण (Diversification) : Capital Market के अंतर्गत अलग-अलग जगह पैसा, निवेशित किया जा सकता है | इससे जोखिम कम हो जाता है और पोर्टफोलियो में स्थिरता आती है |
- लिक्विडिटी (Liquidity – नकदीकरण) : Capital Market के कुछ उपकरण जैसे म्यूचुअल फंड / शेयर को तुरंत बेचकर अपना धन वापिस पा सकते है | इसके लिए जमीन बेचने जितना समय नहीं लगता |
- टैक्स लाभ (Tax Benefits) : कुछ उपकरणों में निवेश करने पर टैक्स में छुट का लाभ भी मिलता है |
निष्कर्ष (Conclusion)
Capital Market Instruments के बारे में यदि सही मार्गदर्शन और योजना हो, तो इस वित्तीय बाजार से अच्छा रिटर्न पाया जा सकता है l यह निवेशक को ना सिर्फ अच्छा रिटर्न देता है साथ ही भविष्य में आर्थिक सुरक्षा भी दे सकता है I इन पांचों उपकरणों में प्रत्येक में कुछ अंश निवेश करके भी एक अच्छा पोर्टफोलियो बन सकता है l
FAQ :
Q1. पूंजी बाजार के उपकरण कौन-कौन से है? पूंजी बाजार (Capital Market) के अंतर्गत, इक्विटी शेयर, प्रेफरेंस शेयर, ETF, म्यूच्यूअल फंड्स, डिबेंचर, बॉन्ड आते है|
Q2. मुद्रा बाजार के प्रमुख उपकरण कौन-कौन से है? मुद्रा बाजार (Money Market) के अंतर्गत ट्रेजरी बिल (T-Bills), कमर्शियल पेपर (CP), कॉल मनी/ नोटिस मनी, रिपर्चेज एग्रीमेंट शामिल है |
Q3. शेयर बाजार के 4 प्रकार क्या है ? शेयर बाजार के 4 प्रकार- प्राथमिक बाजार (IPO), द्वितीयक बाजार (Buy/Sell), डेरिवेटिव बाजार (Futures & Options), कमोडिटी बाजार (Gold/Silver/Crude Oil etc) है |