घर में एक cute सा puppy लाने का मन है? पहले ये 5 खर्चे जान लो |

घर पर puppy पालने की इच्छा है, तो पहले जान लो ये 5 बड़े खर्च | यदि बजट और समय है तो बन सकते है एक बढ़िया pets parents.
puppy पालने के 5 खर्चे

कल्पना करो, एक छोटा-प्यारा सा puppy आपके घर में खेल रहा है| आप देखते हो कि आपके बाहर से वापस आने पर वो बहुत खुश हो जाता है| उसकी छोटी-छोटी मासूम सी आँखों से वो आपका इन्तेजार करता है| ये बहुत ही सुखद अहसास है, जो आपका दिल जीत सकता है |

इस प्रकार के रील्स सोशल मीडिया पर देखकर हमारे मन में भी अक्सर ये आता है—“हमारे घर भी एक प्यारा सा puppy होना चाहिए |

लेकिन एक pet को घर लाना सिर्फ एक भावनात्मक फैसले के साथ-साथ एक बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी भी है| कभी-कभी जोश में ले तो आते है, परन्तु मासिक बजट बिगड़ जाता है| ऐसे में 10-15 वर्ष तक उसकी जिम्मेदारी निभाना, चुनौतीपूर्ण हो जाता है|

यदि आप अपने घर में ये नया मेहमान लाने की सोच रहे हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है| हम विस्तार से जानेगे उन 5 बड़े खर्चों के बारे में, जो एक puppy या pet को घर लाने के बाद हर महीने और हर साल हमारे सामने आने वाले है|

puppy लाने का प्रारंभिक खर्च

puppy लाने का निर्णय हो जाने पर पहला खर्च आता है उसे खरीदने का | इसके मुख्य दो तरीके है-

  1. ब्रीडर से खरीदना : ख़ास ब्रीड जैसे गोल्डन रीट्रीवर, लैब्राडोर, जर्मन शेफर्ड etc खरीदने के लिए ब्रीडर से संपर्क कर खरीदना पड़ता है| इन ब्रीड के puppy का खर्चा ₹15000 से ₹ 1 लाख तक हो सकता है | ये खर्च, इस बात पर भी तय होता है कि puppy ब्रीड की प्यूरिटी क्या है और ब्रीडर की कितनी साख है |
  2. डॉग अडॉप्शन : दूसरा सरल और सस्ता रास्ता है अडॉप्शन का | एनिमल शेल्टर में बहुत से भारतीय देसी डॉग या छोड़े हुए डॉग्स होते है | चाहे तो इनमे से किसी को गोद ले सकते है | इनका खर्च भी बहुत कम होता है लगभग ₹1 – 2 हजार और इनका रखरखाव का खर्च भी ब्रीड डॉग्स के मुकाबले कम होता है |

भारतीय स्ट्रीट डॉग्स (Indies) को अडॉप्ट करना सबसे बेहतरीन विकल्प हो सकता है | ये भारतीय मौसम के अनुकूल होते हैं, इनकी इम्युनिटी बहुत मजबूत होती है, और इनमें बीमारी का खर्च विदेशी ब्रीड्स के मुकाबले बहुत कम होता है|

1. प्रीमियम डॉग फूड और न्यूट्रिशन (पहला खर्च)

puppy को घर लाने से लेकर पूरे जीवन भर एक खर्चा हर महीने होता है, वह है उसका खाना | puppy की ग्रोथ बहुत तेजी से होती है इसलिए उसके लिए हाई प्रोटीन डाइट जरुरी है | ये डाइट कई ब्रांड्स और क्वालिटी में उपलब्ध होते है जिनके प्राइस भी उसी अनुसार होते है |

कुछ इकोनोमी ब्रांड्स (जैसे Pedigree) का मासिक खर्च लगभग ₹3000 तक जाता है वहीं कुछ प्रीमियम ब्रांड्स (जैसे Royal Canin या Orijen) का मासिक खर्च ₹8000 तक जाता है |

अन्य कुछ सप्लीमेंट्स (कैल्शियम, मल्टीविटामिन और ओमेगा-3 सिरप) भी जरुरी होते है उनके लिए, ताकि उनकी हड्डियां और कोट (फर) मजबूत रहें | बाजार में कुछ सिरप भी मौजूद है, जिससे उनकी आँखे और बाल ग्लो करते है |

2. मेडिकल, वैक्सीनेशन और डॉक्टर की फीस (दूसरा खर्च)

puppy पालने का का खर्च सिर्फ उनके पोषण युक्त खाने तक ही सीमित नहीं रहता | उन्हें भी इंसानों के बच्चों जैसे समय-समय पर टीके लगते है | puppy के प्रथम वर्ष में ज्यादा खर्च होता है अपेक्षाकृत बाद के वर्षों से |

शुरुआत में एक puppy को मुख्य रूप से 3 बड़े टीके लगते हैं:

  1. DHLPP (9-in-1 या 7-in-1 वैक्सीन): यह पार्वोवायरस, डिस्टेंपर और लेप्टोस्पायरोसिस जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाता है। इसके 3 डोज लगते हैं। इसका अनुमानित खर्च ₹2500 से ₹5000 खर्च आता है |
  2. एंटी-रेबीज (Anti-Rabies Vaccine): यह डॉग और हमारे परिवार दोनों की सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी है। इसका अनुमानित खर्च अधिकतम ₹1000 होता है |
  3. केनेल कफ (Kennel Cough Vaccine): यदि हमारा डॉग बाहर जाता है या अन्य डॉग्स से मिलता है तो यह वेक्सीन लगवाना जरुरी है| इसका खर्च लगभग ₹ 1200 होता है |

इसके अलावा Deworming (पेट के कीड़े मारना) की दवा जो कि शुरूआती 6 माह तक प्रतिमाह लगती है, जिसका खर्च ₹100 – ₹200 प्रति माह बनता है | डॉक्टर की फीस भी लगती है |

पहले साल के बाद भी, हर साल इन वैक्सीन्स के बूस्टर डोज लगवाने होते है, जिसका सालाना खर्च लगभग ₹3,000 से ₹5,000 रुपये आएगा।

3. पेट ग्रूमिंग और हाइजीन (तीसरा खर्च)

हम सोचे कि डॉग को अपने साबुन से नहला दे, हम जो शैम्पू इस्तेमाल करते है उसे भी लगा दे | लेकिन ऐसा नहीं होता है | इंसानों के इस्तेमाल किये जाने वाले शैम्पू या साबुन का pH लेवल अलग होते है, जो डॉग्स को नुकसान पहुंचा सकते है | उन्हें स्किन इन्फेक्शन, बाल झड़ने जैसी समस्या हो सकती है|

pet ग्रूमिंग में क्या-क्या आता है?

  1. डॉग शैम्पू और कंडीशनर: ₹500 (लगभग)
  2. टिक और फ्ली ट्रीटमेंट (Ticks & Fleas): स्पॉट-ऑन (Spot-on) ट्रीटमेंट या गोलियां आती हैं, जिनका खर्च ₹600 से ₹1,500 प्रति तीन महीने होता है |
  3. प्रोफेशनल ग्रूमिंग सैलून: हेयरकट, नेल ट्रिमिंग, और कान की सफाई का एक बार का खर्च ₹1,500 से ₹3,500 तक होता है।

4. एक्सेसरीज, खिलौने और ट्रेनिंग (चौथा खर्च)

अब घर में डॉग है तो उसकी एक्सेसरीज, उसके खिलौने तो लगेंगे ही | हमारे घर से बाहर होने पर वो क्या करेगा ? अपने खिलौनों से खेलेगा ही |

एक डॉग के लिए अच्छे कॉलर, लीश (पट्टा) और हार्नेस करीब ₹1000 के तो आयेगे ही साथ ही फूड और वॉटर बाउल (स्टील या सिरेमिक) का ₹500 का खर्च अलग | उसे अब जमीं पर तो सोने हम देंगे नही, इसलिए डॉग बेड (सोने के लिए गद्देदार बिस्तर) लेना होगा जो कि ₹1,000 से ₹3,000 तक मिलेगे |

puppy पालने का खर्चा यही नहीं रुकता | puppy के दांत निकलते समय वो घर की चप्पल, फर्नीचर, तार चबाने लगता है | इसलिए उसके चबाने के लिए रबर के खिलौने (जैसे Kong) लेने होंगे, जिनका खर्च ₹500 – ₹2,000 तक होता है |

इसके अलावा हम एक डिसिप्लिन डॉग के मालिक भी तो कहलाना चाहते है | इसलिए डॉग को बचपन से ही बेसिक कमांड्स और पॉटी ट्रेनिंग दी जा सकती है | इसका खर्च ₹5000 से ₹10000 प्रति माह हो सकता है | यह 1 से 2 माह की ट्रेनिग होती है|

5. ट्रैवलिंग, डॉग बोर्डिंग और इमरजेंसी मेडिकल फंड (पांचवा खर्च)

यदि हमें शहर से बाहर शादी या अन्य कार्य में जाना पड़े तो फिर उस डॉग का क्या जो हमारे घर में है | उसे हर जगह तो साथ लेकर नही जा सकते | तो फिर घर पर उसके खाने-पीने का इंतजाम कौन करेगा ? इस परेशानी का हल है “पेट होस्टल” या “डॉग बोर्डिंग” |

हम बाहर जाए तो हमारे pets को हम इन जगहों पर छोड़ सकते है | होस्टल वाले pets का अच्छे से ख्याल रखते है | यहाँ तक कि कुछ होस्टल वाले तो cctv का लाइव एक्सेस भी देते है ताकि हम अपने pets की निगरानी कहीं से भी कर सकें | इन होस्टल्स का शुल्क प्रतिदिन के हिसाब से होता है जो कि ₹500 प्रतिदिन लिया जा सकता है|

इमरजेंसी मेडिकल फंड:

जिस प्रकार इंसानों की तबियत कभी भी ख़राब हो सकती है, उसी प्रकार इन pets की तबियत अचानक ख़राब हो सकती है| कभी कभी वे कुछ जहरीली चीजे भी खा लेते है, चोट भी लग जाती है या फीमेल डॉग्स को बच्चे पैदा करने हो | ऐसे अचानक आई परेशानी के लिए हमारे पास हमेशा इमरजेंसी मेडिकल फंड होना चाहिए | pets के लिए मेडिकल क्लेम या इनश्योरेंस जैसी सुविधा फिलहाल तो हर जगह उपलब्ध नहीं है, इसलिए उसके भविष्य के लिए एक फण्ड जरुर जमा करे | यह फण्ड ₹25000 से ₹30000 का होना चाहिए |

बजट के अंदर डॉग की देखभाल कैसे करें?

यदि हमारा मेनेजमेंट सही है तो बहुत हद तक हम इन खर्चों को नियंत्रित कर सकते है|

  • घर का खाना शामिल करें: महंगे कमर्शियल डॉग फूड पर निर्भरता कम करने के लिए डॉग की डाइट में उबला हुआ चिकन, चावल, कद्दू, दही और उबले अंडे शामिल करें। वेटेनरी डॉक्टर से संपर्क कर ही डाइट अपनाए |
  • ग्रूमिंग खुद सीखें: ग्रूमिंग करना इतना कठिन भी नहीं है हम कर ना पाए | यूट्यूब पर यह आसानी से सीखा जा सकता है | डॉग्स को नहलाना, हेयर कट, नेल कट हम घर पर कर सकते है, इससे हमारा पैसा ही बचेगा |
  • वैक्सीनेशन कभी मिस न करें: puppy पालने का खर्चा कितना भी हो जाए, लेकिन वैक्सीनेशन को कभी ना टालें | समय निकल जाने पर, उन्हें गंभीर एवं खर्चीली बीमारी हो जाती है| इससे अच्छा तो वैक्सीनेशन ही करवा लेना चाहिए |
  • pets insurance : हर जगह तो नहीं लेकिन बड़े शहरों में pets insurance मिलने लगे है | सलाना छोटा सा प्रीमियम देकर, बड़े मेडिकल खर्चों को टाला जा सकता है |

निष्कर्ष

puppy को घर लाना एक ख़ास अनुभव है| वह बिना स्वार्थ हमसे प्यार करता है | उसके मासूम चेहरे को देखकर हम हमारा मानसिक तनाव तक भूल जाते है | इसके बदले हमे उसके अच्छे स्वास्थ्य और ख़ुशी के लिए सार्थक प्रयत्न करना ही चाहिए |

इस लेख में जो भी खर्च बतलाये गए है वह औसतन है| अतः puppy पालने का खर्चा मासिक ₹1000-₹1500 बनता है | यदि हम हमारा बजट और समय, उस जान को दे सकते है तो ही उसे घर लाना चाहिए |

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