भारत एक कृषि प्रधान देश होने के कारण यहाँ की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। किसानों को खाद, बीज ,कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और मशीनरी जैसी जरूरतों के लिए समय-समय पर धन की आवश्यकता होती ही है। इसलिए ही सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना शुरू की ताकि किसानो को ऋण आसानी से, कम ब्याज दर पर उपलब्ध हो सके और उनका साहूकारों से बचाव हो |
इस लेख में हम जानेंगे कि किसान क्रेडिट कार्ड क्या है ? इसके क्या फायदे और क्या नुकसान हो सकते है ? इसके अलावा किसान क्रेडिट कार्ड कैसे बनवाये, स्टेप-बाय-स्टेप समझेंगे |
किसान क्रेडिट कार्ड क्या है ?
वर्ष 1998 में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और नाबार्ड की सिफारिश पर केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का प्रमुख उद्धेश्य किसानों को तुरंत एवं कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करवाना है | बैंक एक निर्धारित सीमा तक यह ऋण, किसानों को दे सकती है |
यह सुविधा, क्रेडिट कार्ड की तरह काम करती है | किसान, अपनी खेती की जरूरतों के हिसाब से पैसे निकाल सकता है | समय पर ऋण का भुगतान होता है, जिससे यह किसान क्रेडिट कार्ड का नवीनीकरण हो जाता है |
किसान क्रेडिट कार्ड की मुख्य विशेषताएँ
- कम ब्याज दर : ब्याज दर अपेक्षाकृत कम होती है (लगभग 7%) | इसके अलावा यदि समय पर भुगतान किया जाए तो 3% तक ब्याज पर सब्सिडी मिल सकती है |
- ऋण सीमा में लचीलापन : यहाँ ऋण सीमा लचीली होती है अर्थात जमीन के आकार एवं फसल के अनुसार ऋण सीमा निर्धारित होती है |
- समय सीमा : इसका बार-बार आवेदन करने की जरूरत नहीं होती क्योंकि इसकी एक बार ऋण सीमा तय होने के बाद यह 5 वर्ष तक बने रहती है|
- फसल बीमा : प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, औलावृष्टि आदि पर फसल बीमा द्वारा आर्थिक सुरक्षा भी मिलती है |
- कार्ड सुविधा : एटीम कार्ड / डेबिट कार्ड / क्रेडिट कार्ड जैसे कार्ड होने के कारण धन निकासी की सुविधा आसान है |
किसान क्रेडिट कार्ड के फायदे
अब बात करते हैं किसान क्रेडिट कार्ड के फायदे की, जो इस योजना को किसानों के लिए बेहद उपयोगी बनाते हैं।
1. किसानो को साहूकारों के चंगुल से बचाना :
पहले समय में किसानों को जमीन, सोना, गहने आदि चीजे गिरवी रख कर साहुकारो से कर्ज लेना पड़ता था | और भुगतान समय से थोड़ी देर होने पर भी साहूकार, उनकी गिरवी रखी चीज पर कब्जा जमा लेता था | इसके अलावा, साहूकारों द्वारा लगाया ब्याज दर भी बहुत ज्यादा होता था |
किसान क्रेडिट कार्ड के आने से किसान साहूकारों से कर्ज ना लेकर बैंक से लेता है जिसके लिए उन्हें कोई चीज गिरवी भी नहीं रखनी पड़ती | यदि भुगतान में थोड़ी देरी जाए तो ब्याज दर ही लगती है | इसके अलावा, KCC में ब्याज दर बहुत कम लगती है |
2. तुरंत ऋण उपलब्धता :
कभी-कभी किसानों को धन की आवश्यकता तुरंत होती है | इस कक कार्ड के जरिये किसान तुरंत पैसा निकाल लेता है |
3. फसल चक्र के अनुसार भुगतान
किसान, अपनी फसल के बिकने के पश्चात भुगतान कर सकता है | इसके कारण उस पर आर्थिक दबाव कम होता है|
4. पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए भी उपयोगी
KCC सिर्फ खेती ही नहीं अपितु पशुपालन एवं मत्स्य पालन के लिए भी उपलब्ध रहता है |
5. RuPay कार्ड :
बहुत से बैंक, इसे स्मार्ट कार्ड / एटीम कार्ड के रूप में उपलब्ध करते है, जोकि RuPay कार्ड के होते है | इससे डिजिटल लेनदेन आसान हो जाता है |
किसान क्रेडिट कार्ड के नुकसान
1. समय से भुगतान ना करने पर ब्याज दर का बढ़ना :
किसान द्वारा ऋण का समय से भुगतान ना करने पर ब्याज दर में बढोत्तरी हो सकती है | इसलिए समय पर भुगतान कर नवीनीकरण (Renew) किया जा सकता है|
2. ऋण जाल का खतरा :
ऋण का बेवजह उपयोग या व्यक्तिगत उपयोग करने से ऋण बढ़ता जाता है | जिससे भुगतान करने में परेशानी आती है |
3. बैंक निति पर निर्भरता :
यह KCC पूर्ण रूप से बैंक और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की नीतियों पर निर्भर करता है | बैंक और RBI द्वारा जारी ऋण ब्याज दर पर ही KCC का लाभ मिलता है |
किसान क्रेडिट कार्ड कैसे बनवाये
1. KCC के लिए पात्रता :
- किसान या आवेदक, भारत का नागरिक होना आवश्यक है |
- आवेदक के पास खेती योग्य भूमि हो अथवा वह बटाईदार हो |
- आवेदक की आयु 18 वर्ष से 75 वर्ष के मध्य हो |
- इसके अलावा संयुक्त किसान समूह या स्वयं सहायता समूह भी आवेदन कर सकते है |
2. KCC हेतु आवश्यक दस्तावेज :
- आधार कार्ड
- पैन कार्ड
- बैंक खाता विवरण
- भूमि के मालिकाना हक़ होने के दतावेज
- पासपोर्ट साइज़ फोटो
- आवेदन फॉर्म
3. आवेदन प्रक्रिया :
नजदीकी बैंक शाखा में जाकर, KCC आवेदन फॉर्म भरें। आवश्यक दस्तावेज की फोटोकापियां आवेदन के साथ संलग्न कर जमा करें।
बैंक द्वारा सत्यापन के बाद ऋण सीमा तय की जाती है। स्वीकृति के बाद किसान को किसान क्रेडिट कार्ड जारी कर दिया जाता है।
ऋण सीमा की निर्भरता :
KCC की ऋण सीमा, निम्न बातों पर निर्भर करती है |
- कृषि भूमि का आकार
- फसल का प्रकार (खरीफ/रबी/जायद)
- लागत (बीज/खाद/मशीन/सिंचाई आदि)
- पिछले ऋण का रिकॉर्ड
- आमतौर पर ₹50,000 से ₹3,00,000 तक सीमा रहती है, परन्तु उससे ऊपर का ऋण भी मिल सकता है |
किसान क्रेडिट कार्ड और सरकारी सब्सिडी
KCC का एक और लाभ जो KCC को ख़ास बनाता है | KCC में ऋण का समय के पूर्व भुगतान किया जाए तो वहां ब्याज दर में छुट मिलती है |
बैंक KCC में लगभग 7% वार्षिक ब्याज दर लगाती है | जब किसान, ऋण को समय सीमा से पूर्व चुका दे, तब सरकार, Prompt Repayment Incentive (PRI) के रूप में 3% तक सब्सिडी देती है | जिससे प्रभावी ब्याज दर लगभग 4% रह जाती है |
सब्सिडी कब और कैसे मिलती है?
- किसान का बैंक खाता KCC से जुड़ा होता है, जिससे सरकार द्वारा भेजी गयी सब्सिडी, सीधे किसान के खाते में आती है |
- इसके लिए किसान को अपना खाता सक्रीय रखना होता है |
- प्रत्येक वित्तीय वर्ष में सरकार द्वारा तय किया जाता है कि कितने प्रतिशत सब्सिडी देना है |
निष्कर्ष
किसान क्रेडिट कार्ड किसानों के लिए एक बेहद जरुरी और लाभकारी योजना है। इसके माध्यम से किसान कम ब्याज दर पर आसानी से ऋण प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि किसान क्रेडिट कार्ड के नुकसांन भी हैं, लेकिन सही उपयोग और समय पर भुगतान से इनसे बचा जा सकता है।
अगर आप किसान हैं या आपके परिवार में कोई खेती करता है, तो किसान क्रेडिट कार्ड कैसे बनवाये इसकी जानकारी अवश्य लें और इस योजना का लाभ उठाएँ।
अंततः, किसान क्रेडिट कार्ड के फायदे इसे एक प्रभावी वित्तीय साधन बनाते हैं, जो किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।