क्या है e-RUPI वाउचर ? जानिए इस कैशलेस वाउचर के फायदे |

e-RUPI Vouchar

आज भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली की तारीफ़ वैश्विक स्तर पर हो रही है| वर्ष 2025 में विश्व के लगभग 50% ट्रांजैक्शन, भारत के UPI के जरिये ही हुए | यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), सिर्फ एक QR कोड और लेन-देन आसान |

वहीं दूसरी तरफ सब्सिडी वितरण एवं सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लिए ऐसे अत्याधुनिक साधन की जरूरत है, जिससे पारदर्शिता और भी आसान हो जाए | इस हेतु “e-RUPI वाउचर” ने इस डिजिटल क्रांति में कदम रखा |

e-RUPI” एक ऐसा कैशलेस (नकदी रहित) और कॉन्टैक्टलेस (संपर्क रहित) साधन है, जिसका उपयोग विशिष्ट सेवाओं के भुगतान के लिए किया जाता है ।

e-RUPI क्या है?

e-RUPI एक ऐसा डिजिटल वाउचर है | यह डिजिटल वाउचर, लाभार्थी को उसके मोबाइल पर एसएमएस (SMS) स्ट्रिंग या क्यूआर (QR) कोड के रूप में भेजा जाता है| यह पूरी तरह कैशलेस (नकदी रहित) और कॉन्टैक्टलेस (संपर्क रहित) साधन है| यहाँ हम आसानी से समझ सकते है कि e-RUPI एक प्री-पेड (Pre-paid) ई-वाउचर है |

यह ना तो कोई क्रिप्टोकरंसी (Cryptocurrency) है ना ही RBI द्वारा जारी कि गयी डिजिटल करेंसी | यह भारतीय रुपये (Indian Rupee) द्वारा समर्थित एक सुरक्षित भुगतान तंत्र है| इसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूपीआई (UPI) इकोसिस्टम के आधार पर बनाया था |

सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थी को मिले, मध्यस्थता कि जरूरत ना हो और उस धन का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए हो जिसके लिए उसे आवंटित किया गया है,

e-RUPI कब लांच हुआ ?

e-RUPI डिजिटल भुगतान को सर्वप्रथम भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2 अगस्त, 2021 को वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लॉन्च किया था | इसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने वित्तीय सेवा विभाग (Department of Financial Services), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (Ministry of Health and Family Welfare), और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (National Health Authority – NHA) के साथ मिलकर विकसित किया है|

इसका प्रथम उपयोग स्वास्थ्य क्षेत्र में हुआ था, मुंबई के एक निजी टीकाकरण केंद्र में कोविड-19 टीकाकरण के नकद रहित भुगतान की सुविधा प्रदान करने के लिए किया गया था |

e-RUPI कैसे काम करता है?

e-RUPI की कार्यप्रणाली बहुत सरल है, इसे लाभार्थी के अनुकूल बनाया गया है | देश का वह व्यक्ति जिसे ज्यादा तकनीकी ज्ञान नही है, वह भी इसका लाभ उठा सकता है| यह नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) द्वारा विकसित एक वेब-आधारित पोर्टल के माध्यम से मैनेज करते है|

कोई भी सरकारी एजेंसी या कॉर्पोरेट (जिसे ‘प्रायोजक’ कहा जाता है) जो किसी विशिष्ट सेवा के लिए धन देना चाहता है, वह एनपीसीआई (NPCI) के अंतर्गत बैंकों से संपर्क करता है । इसके अलावा प्रायोजक लाभार्थियों की सूची, उनके खाता संख्या, मोबाइल नंबर और सेवा का उद्देश्य (जैसे अस्पताल का बिल या उर्वरक की खरीद) बैंक को देता है| इसके बाद, SMS या QR कोड लाभार्थियों के मोबाइल नंबर पर भेजता है|

इसके बाद, लाभार्थी अधिकृत सेवा प्रदाता (जैसे अस्पताल, स्कूल या खाद की दुकान) के पास जाता है, वहां प्रदाता को SMS या QR कोड दिखाता है| वह प्रदाता, उसे स्कैन करता है| स्कैन करने पर वाउचर में पहले से मौजूद राशि प्रदाता के बैंक खाते में सीधे ट्रान्सफर हो जाती है| सेवा पूरी तरह से प्रदान करने के पश्चात ही भुगतान जारी किया जाता है, जिससे यह प्रणाली पूरी तरह से परिणाम-लिंक्ड (Outcome-linked) बन जाती है|

e-RUPI जारी करने वाले भागीदार बैंक

e-RUPI को जारी और भुनाने (Redeem) के लिए NPCI की कई प्रमुख बैंकों के साथ साझेदारी हुई है|

क्र.बैंक का नाम (Bank Name)वाउचर जारी करने की सुविधा (Availability of issuing Vouchar)मर्चेंट एक्वायरिंग ऐप (Acquiring App)
1.स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)उपलब्ध (Available)YONO SBI Merchant Pay
2.बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda)उपलब्ध (Available)BHIM Baroda Merchant Pay
3.पंजाब नेशनल बैंक (PNB)उपलब्ध (Available)PNB Merchant Pay
4.केनरा बैंक (Canara Bank)उपलब्ध (Available)लागू नहीं (NA)
5.इंडियन बैंक (Indian Bank)उपलब्ध (Available)लागू नहीं (NA)
6.एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank)उपलब्ध (Available)HDFC Business App
7.Axis Bankउपलब्ध (Available)Bharat Pe
8. ICICI Bankउपलब्ध (Available)Bharat Pe & Pine Labs

e-RUPI के फायदे

1. विनिर्दिष्ट उद्धेश्य एवं लक्ष्य-आधारित वितरण

e-RUPI एक लक्ष्य-आधारित वितरण प्रणाली पर कार्य करता है| उदाहरण स्वरुप यदि सरकार उर्वरक खरीदी पर 500 का e-वाउचर प्रदान करती है तो यह भुगतान, अधिकृत उर्वरक विक्रेता के पास ही भुनाया जा सकेगा | इसका मतलब यह है कि वह उसे नगद निकासी नहीं करवा सकता नाही किसी अन्य तरीके से उसका लाभ ले सकता है | उसे सिर्फ उर्वरक खरीदने पर ही लाभ प्राप्त होगा |

2. बिचौलियों की समाप्ति और भ्रष्टाचार पर लगाम

परम्परागत तरीको से किये भुगतान में सरकार एवं लाभार्थी के मध्य बहुत से बिचोलिये होते थे, जिससे भ्रष्टाचार होता था | परन्तु e-RUPI के आजाने से यह परेशानी खत्म हो गयी | ई-रुपी एक सीधा डायरेक्ट-टू-बेनिफिशियरी (Direct-to-Beneficiary) तंत्र है| वाउचर में पहले से पैसा होता है बस प्रदाता को स्कैन करना है और भुगतान सीधे और सरल तरीके से पूर्ण हो जाता है|

3. वित्तीय समावेशन में वृद्धि

तकनिकी रूप से सक्षम लोग तो इसका तरीका जानते है | परन्तु क्या वे लोग जिन्हें तकनीकी साक्षारता कम है वे इसके द्वारा लाभ प्राप्त कर सकते है ? जवाब है हाँ | इसे किसी स्मार्ट फ़ोन की आवश्यकता नहीं है, पुराने मोबाइल फ़ोन में SMS के द्वारा भी यह सुविधा लाभार्थी को मिल जाती है| इस कारण, देश के वित्तीय समावेशन में वृद्धि होती है|

4. यह लाभार्थी के विवरण को अत्यंत गोपनीय रखता है | प्री-पेड वाउचर होने कि वजह से, लाभार्थी प्रदाता को किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत वित्तीय विवरण जैसे कि बैंक खाता संख्या, आधार कार्ड विवरण, या डेबिट कार्ड का पिन साझा नहीं करता | इससे यह सुरक्षित भुगतान तंत्र बनता है|

5. सरकारी योजनाओं के साथ साथ -साथ निजी कंपनियां भी e-RUPI का उपयोग करने के लिए आगे आने लगे है| उदाहरण- यात्रा भत्ता, भोजन भत्ता, स्वास्थ्य जांच आदि | पहले यात्रा करने के पश्चात या भोजन के पश्चात उसके बिल को कंपनी में भुगतान के लिए देना होता था, उसके बाद कंपनी यात्रा या भोजन बिल को वेरीफाई कर भुगतान करती थी| प्री-पेड वाउचर होने कि वजह से यह परेशानी और देरी खत्म हो गयी |

निष्कर्ष

e-RUPI डिजिटल इंडिया विज़न के लिए एक सरल और क्रांतिकारी कदम है | यह सुशासन (Good Governance), भ्रष्टाचार उन्मूलन, और कॉर्पोरेट पारदर्शिता के लिए एक तकनीकी हथियार है | कृषि, शिक्षा और राशन वितरण जैसे क्षेत्रों में इसका उपयोग कर लाभ, अंतिम लाभार्थी तक पहुचे, यह सुनिश्चित किया जा सकता है|

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