हम बचपन से लोहार, सुनार, कुम्हार और बढ़ई जैसे शब्द सुनते आ रहे है| ये केवल जातियां ही नहीं अपितु समाज के वे हिस्से है जिन्हें अपने कार्यक्षेत्र द्वारा जाना गया है| जैसे लोहार शब्द, लोहे और इस्पात का काम करने वाले लोगों के लिए है| वहीं सुनार, सोने का तथा कुम्हार, मिट्टी का काम करने के कारण उपयोग होता है|
ये पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार न केवल हमारी संस्कृति को जीवित रखते हैं, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करते है| इन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए ही केंद्र सरकार “पीएम विश्वकर्मा योजना” लायी है|
आज हम विस्तार से जानेंगे कि पीएम विश्वकर्मा योजना 2026 क्या है, इसके लिए आवेदन कैसे करें और इससे होने वाले लाभ क्या-क्या है| यदि आप एक पारंपरिक कारीगर या शिल्पकार है तो यह लेख पढकर, आपको आपके हुनर को व्यवसाय में बदलने की दिशा मिल सकती है |
पीएम विश्वकर्मा योजना क्या है?
पीएम विश्वकर्मा योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है| इस योजना का मुख्य उद्देश्य, स्थानीय स्तर पर हाथ और औजारों के माध्यम से काम करने वाले लोगों का आर्थिक विकास करना हैं| इस योजना के कुछ प्रमुख उद्धेश्य जैसे कारीगरों को पहचान (Identity), ट्रेनिंग (Training), आधुनिक टूलकिट (Toolkit) और कम ब्याज दर पर ऋण (Loan) प्रदान करना है।
इस योजना के अंतर्गत, केंद्र सरकार द्वारा ₹13,000 करोड़ के बजट निर्धारण किया गया है| इसके माध्यम से लाखों कारीगर एवं शिल्पकार परिवारों को सीधा लाभ पहुंचा है|
योजना के मुख्य लाभ
इस योजना से जुड़ने वाले लोगों को कई प्रकार के लाभ प्राप्त हो सकते है, जो निम्न है|
1. प्रमाण पत्र और आईडी कार्ड
इसके अंतर्गत, लाभार्थियों को “पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र” एवं “पहचान पत्र (Identity Card)” मिलता है, जो कि व्यावसायिक दृष्टिकोण से महत्पूर्ण है|
2. कौशल सुधार (Skill Upgradation)
कौशल सुधार हेतु कारीगरों को 5 से 7 दिवसीय बुनियादी ट्रेनिंग दी जाती है| इसके अगले उन्नत (Advance) चरण की ट्रेनिंग करीब 15 दिनों की होती है|
3. ट्रेनिंग स्टाइपेंड
ट्रेनिंग के दौरान कारीगरों को ₹500 प्रतिदिन का भत्ता (Stipend) दिया जाता है।
4. टूलकिट प्रोत्साहन
ट्रेनिंग पूर्ण होने के बाद, पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को ₹15000 की अनुदान राशि भी उपलब्ध कराई जाती है, ताकि वे आधुनिक औजार और मशीनरी खरीद सकें| ये राशि, ई-आरयूपीआई (e-RUPI) वाउचर के माध्यम से दी जाती है|
5. सस्ता ऋण
इस योजना में पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को बिना किसी गारंटी के ₹3 लाख रुपये तक का ऋण मिल सकता है, जिसकी ब्याज दर भी बहुत कम (5%) है| यह ऋण “पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र” के आधार पर मिलता है| यह दों चरणों में मिलता है|
प्रथम चरण : जब 5-7 दिन की बुनियादी ट्रेनिंग होती है| तब प्रमाण पत्र लेने के पश्चात, प्रथम चरण के ऋण के लिए आवेदन कर सकते है| प्रथम चरण में ऋण सीमा ₹ 1 लाख रहती है, तथा इसके चुकाने की अवधि 18 माह होती है|
दूसरा चरण : यदि पहले चरण के ऋण का भुगतान, 18 माह या उससे पूर्व किया जाए| तब ही दुसरे चरण का ऋण मिल सकता है| दुसरे चरण की ऋण सीमा ₹ 2 लाख रहती है| इसकी अवधि 30 माह रहती है|
6. मार्केटिंग सपोर्ट
सरकार आपके द्वारा बनाए गए उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग में भी मदद करती है।
पीएम विश्वकर्मा योजना 18 कैटेगरी लिस्ट
इस योजना में 18 पारंपरिक व्यवसाय सम्मिलित किये गए है| जो की निम्न है
| क्र. | व्यवसाय | क्र. | व्यवसाय |
| 1 | बढ़ई/सुतार | 11 | राजमिस्त्री |
| 2 | नाव बनाने वाले | 12 | टोकरी/चटाई/झाड़ू बनाने वाले |
| 3 | अस्त्र बनाने वाले | 13 | गुड़िया और खिलौने बनाने वाले |
| 4 | लोहार | 14 | नाई |
| 5 | हथौड़ा और टूलकिट निर्माता | 15 | मालाकार/माली |
| 6 | ताला बनाने वाले | 16 | धोबी |
| 7 | सुनार | 17 | दर्जी |
| 8 | कुम्हार | 18 | मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले |
| 9 | मूर्तिकार | ||
| 10 | मोची |
यदि हम इनमे से कोई भी पारंपरिक व्यवसाय करते है, तो पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ ले सकते है| इसके लिए कुछ पात्रता एवं शर्ते भी पूरी करना होती है|
पात्रता एवं शर्ते (Eligibility Criteria)
- आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए|
- आवेदक पारंपरिक रूप से हाथ एवं औजारों द्वारा काम करने वाला कारीगर होना चाहिए है।
- परिवार में से केवल एक ही सदस्य (पति, पत्नी या अविवाहित बच्चे) इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकता है।
- आवेदक ने पिछले 5 वर्षों में स्वरोजगार के लिए केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य लोन आधारित योजना (जैसे PMEGP, PM SVANidhi, Mudra Loan) का लाभ न लिया हो।
- सरकारी नौकरी में कार्यरत व्यक्ति या उनके परिवार के सदस्य इस योजना का लाभ नहीं ले सकते| वे इसके लिए पात्रता में नहीं आते|
आवश्यक दस्तावेज (Documents Required)
- मोबाइल नंबर से लिंक आधार कार्ड
- बैंक पासबुक की छायाप्रति (Photocopy)
- परिवार के सदस्यों की पहचान हेतु राशन कार्ड
- सक्रीय मोबाइल नंबर
- पैन कार्ड
इसके अलावा अन्य दस्तावेज भी मांगे जा सकते है, जैसे पूर्व में लिए हुए ऋण के पूर्ण भुगतान का No Dues Certificate, CIBIL score आदि|
पीएम विश्वकर्मा योजना ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल होने के कारण निकट के CSC (Common Service Center) पर जाकर आवेदन कर सकते है|
1. मोबाइल और आधार वेरिफिकेशन
सर्वप्रथम हम आधिकारिक पोर्टल पर जाकर, आधार नंबर का सत्यापन करवायेगे | इसके लिए आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर OTP आता है| OTP दर्ज करते ही आधार नंबर सत्यापन पूरा हो जायेगा |
2. कारीगर पंजीकरण फॉर्म
एक बार सत्यापन पूरा हो जाए, उसके बाद हम “पीएम विश्वकर्मा रजिस्ट्रेशन फॉर्म” भरेंगे | इसमें हम अपनी व्यक्तिगत जानकारी, अपने व्यवसाय और बैंक खाते का विवरण प्रविष्ट करते है|
3. डिजिटल आईडी और सर्टिफिकेट
फॉर्म जमा होने के बाद, हमारा विवरण जिला और राज्य स्तर पर सत्यापित किया जाएगा। सत्यापन के बाद हमें पीएम विश्वकर्मा डिजिटल आईडी और सर्टिफिकेट मिल जाएगा।
4. कौशल प्रशिक्षण और टूलकिट ई-वाउचर
सर्टिफिकेट मिलने के बाद हमें बुनियादी प्रशिक्षण (Basic Training) के लिए बुलाया जाता है| प्रशिक्षण पूरा होते ही हमारे खाते में टूलकिट के लिए ₹15,000 का ई-वाउचर या अनुदान राशि भेज दी जाती है|
पीएम विश्वकर्मा योजना Login: स्टेटस कैसे चेक करें?
निचे दिए गए तरीके से हम लॉग इन कर अपना आवेदन की स्थिति (Status) देख सकते है|
- आधिकारिक वेबसाइट pmvishwakarma.gov.in पर जाएं।
- ‘Login’ बटन पर क्लिक करें और ‘Applicant/Beneficiary Login’ चुनें।
- अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और OTP डालें।
- डैशबोर्ड पर आप अपने आवेदन की स्थिति (Status) देख सकते हैं और अपना सर्टिफिकेट (Certificate) भी डाउनलोड कर सकते हैं।
निष्कर्ष
पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों को आर्थिक आत्मनिर्भर तो बना ही रही है, साथ ही इससे उन्हें नये सामाजिक बदलाव में सहसम्मान शामिल भी कर रही है| 2026 में तकनीक के बढ़ते प्रभाव के साथ, इन पारंपरिक कलाकारों का आधुनिक होना बहुत जरूरी है| अगर आप या आपके परिचित किसी पारंपरिक हुनर से जुड़े हैं, तो आज ही इस योजना में पंजीकरण कराएं और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम बढ़ाए|
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या इस योजना के लिए कोई आवेदन शुल्क है? नहीं, पंजीकरण पूरी तरह से निःशुल्क है| पंजीकरण का कोई पैसा नहीं लगता | संभवतः CSC केंद्र पर सर्विस चार्ज लग सकता है।
2. टूलकिट के पैसे कब मिलते हैं? बुनियादी कौशल प्रशिक्षण (Basic Skill Training) पूरा होने के बाद लाभार्थी को ₹15,000 की टूलकिट प्रोत्साहन राशि दी जाती है। ये राशि, ई-आरयूपीआई (e-RUPI) वाउचर के माध्यम से दी जाती है|
3. क्या महिलाएं भी इस योजना में आवेदन कर सकती हैं? हां बिलकुल, दर्जी (Tailor) और टोकरी बनाने वाले जैसे कई व्यवसायों में महिलाएं बड़ी संख्या में आवेदन कर लाभ उठा रही हैं|