भारत देश में सोना चांदी सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि सुरक्षा और निवेश के प्रतीक माने जाते हैं। बदलते समय में निवेश के तौर तरीके बदलते हैं। जहाँ पहले समय में लोग सिर्फ भौतिक सोना (Physical Gold) में ही निवेश करते थे, परन्तु आज डिजिटल गोल्ड, ETF और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में भी दिलचस्पी ले रहे हैं।
2026 में यदि आपको भी अपना पोर्टफोलियो मजबूत करना हो, तो यह लेख आपके लिए है। यहाँ हम सोना चांदी निवेश के हर पहलू, टैक्स नियमों और ब्याज के लाभों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
निवेश के माध्यम: भौतिक, डिजिटल और प्रतिभूति-आधारित प्रणालियाँ
भौतिक निवेश: सिक्के, बार और आभूषण
सोना चांदी का भौतिक रूप आज भी भारत में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है | सोना “22कैरेट” और “24कैरेट” की शुद्धता के आधार पर चयनित होता है। आभूषणों का उपयोग मुख्यतः व्यक्तिगत उपभोग और सामाजिक सम्मान से प्रेरित होता है, लेकिन निवेश के नजरिये से यह कम उपयोगी समझा जाता है। इसका मुख्य कारण इसका ‘निर्माण शुल्क’ (Making Charge) है जो सामान्यतः 8% से 25% तक लग सकता है |
आभूषणों के बजाय, सिक्के और बुलियन (बिस्कुट) में मेकिंग चार्ज न्यूनतम होता है और पुनर्विक्रय (Resale) मूल्य अधिक मिलता है | इसलिए निवेश के तौर पर सिक्के और बुलियन (बिस्कुट) अधिक उपयुक्त समझा जाता है |
इसके अलावा, खरीदी पर GST भी 3% से 5% तक लगता है, इस कारण भी निवेश लागत बढ़ जाती है | इस भौतिक रूप को सुरक्षित रखने के लिए बैंक लॉकर लिया जाए तो उसका शुल्क भी देय रहता है |
डिजिटल गोल्ड और सिल्वर
वे निवेशक जो कम मात्रा में गोल्ड में निवेश करना चाहते है परन्तु उसकी अन्य लागत से बचना चाहते है, डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) उनके लिए एक अच्छा माध्यम है | प्लेटफॉर्म जैसे पेटीएम, फोनपे और गूगल पे निवेशकों को न्यूनतम लागत में निवेश की सुविधा देते है | निवेशक द्वारा ख़रीदा गया सोना चांदी उनके नाम पर विक्रेता द्वारा सुरक्षित और बीमित तिजोरियों (Vaults) में रखा जाता है।
चोरी के भय और लागत में कमी चाहते है तो डिजिटल गोल्ड बहुत अच्छा उपाय है, खासकर युवा पीढ़ी में यह ज्यादा प्रचलित है |
सोना चांदी में निवेश करने हेतु सही प्लेटफार्म का चुनाव जरुरी हो जाता है | क्योंकि डिजिटल गोल्ड, RBI (Reserve Bank of India) एवं SEBI (Securities and Exchange Board of India) द्वारा सीधे तौर पर विनियमित नहीं होता |
एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) और म्यूचुअल फंड्स
यदि हमारे पास Dmat Account (डीमेट खाता) है तो सोना चांदी के ETF की सुविधा हम आसानी से ले सकते है | इसमें न तो ‘निर्माण शुल्क’ (Making Charge) लगता है और न ही सुरक्षा की चिंता रहती है। ETF की पारदर्शिता और लचीलापन के कारण यह नए और कम लागत वाले निवेशको में ज्यादा प्रचलित है |
इसकी एक मात्र मुख्य लागत ‘एक्सपेंस रेशियो’ (Expense Ratio) और वह भी 0.5% से कम होती है ।
जिन लोगों के पास Dmat Account (डीमेट खाता) नहीं है वे म्यूच्यूअल फण्ड (Mutual Fund) में निवेश कर सकते है | ये फण्ड भी, निवेशित कम्पनी (जिसमें हम निवेश कर रहे है) द्वारा सोना चांदी ETF में निवेश होता है | इसके अंतर्गत सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिये निवेश होता है |
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond)
गोल्ड में सबसे ज्यादा सुरक्षित और लाभदायक निवेश अगर किसी को माना गया है तो वह है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) | इन्हें भारत सरकार द्वारा RBI के माध्यम से जारी किया जाता है | ये बॉन्ड, सबसे शुद्ध सोने कि कीमत में वृध्दि का लाभ तो देते ही है, साथ ही ये हमें 2.5% का निश्चित ब्याज भी देते है | यह बॉन्ड की परिपक्वता (Maturity) अवधि 8 वर्ष होती है तथा परिपक्वता पर कोई टैक्स नहीं लगता |

शुद्धता का तकनीकी विश्लेषण: 22कैरेट vs 24कैरेट
“सोना चांदी” की खरीद के समय शुद्धता सबसे महत्वपूर्ण कारक होती है | 24 कैरेट (24K) सबसे शुध्द सोना होता है, इसके बाद 22 कैरेट (22K) माना जाता है |
24 कैरेट (24K) सोना : 24K सोने में कोई अन्य धातु का मिश्रण नहीं होता | इसकी शुध्दता 99.99 % होने के कारण यह बहुत ही नरम और लचीला है | इससे जटिल आभूषण बनाना संभव नहीं होता, इस कारण यह सिक्के, बुलियन (बिस्कुट) बनाने के काम आता है | ताकि लोग, शुद्ध सोने में निवेश कर सके |
22 कैरेट (22K) सोना : 22K सोने का उपयोग आभूषण बनाने में सबसे अधिक होता है | इसमें 91.67% शुद्ध सोना होता है बाकि तांबा, जस्ता या निकल, चांदी जैसी धातुओं का मिश्रण रहता है | मिश्रण करने से सोने में मजबूती आ जाती है, जिससे जटिल से जटिल आभूषण बनाना संभव हो पता है | इसका अन्य नाम “916 गोल्ड” भी है |
हॉलमार्किंग और बीआईएस (BIS) प्रमाणीकरण : भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), हॉलमार्किंग द्वारा सोने की शुद्धता सुनिश्चित करता है | बीआईएस लोगो, शुद्धता का संकेत (जैसे 22K916) और 6-अंकीय अल्फ़ान्यूमेरिक HUID (Hallmark Unique Identification) कोड, एक वैध हॉलमार्क की पहचान है | HUID के जरिये हम यह पता लगा सकते है कि सोना किस प्रयोगशाला में जांचा गया है, ताकि मिलावट सम्बन्धी धोखाधड़ी से बचा जा सके|

सोना चांदी में निवेश क्यों है जरूरी?
आर्थिक उतार-चढाव और महंगाई (Inflation) के समय सोना चांदी हमेशा एक ‘सुरक्षित निवेश /विनिवेश’ (Safe Investment/Divestment) के रूप में उभरते हैं।
- मुद्रास्फीति से बचाव: आमतौर पर देखा गया है कि जब रुपये की कीमत (Value) गिरती है, तब सोने की कीमतें बढ़ती है।
- लिक्विडिटी: लिक्विडिटी से अभिप्राय यह है कि आवश्यकता होने पर इसे तुरंत नगद राशी (Cash) में परिवर्तित करवा सकते है |
- विविधता (Diversification) : यदि शेयर मार्केट में पोर्टफोलियो में गिरावट भी होती है, तब सोना पोर्टफोलियो का बचाव करता है |
Taxation संरचना 2026
सोना चांदी में निवेश करने पर, Tax निवेश के तरीके और निवेश की अवधि के अनुरूप होता है|
- अल्पकालिक पूंजीगत लाभ (Short-Term Capital Gains – STCG) : सोना या चांदी को निश्चित अवधि (Holding Period) के पहले बेचने पर, उसका लाभ हमारी वार्षिक आय में जोड़ा जाता है| फिर हम जिस टैक्स स्लैब में आते है उस हिसाब से टैक्स लगता है|
- दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (Long-Term Capital Gains – LTCG) : जुलाई 2024 में नियमों में बदलाव होने पर, सोने और चांदी पर LTCG टैक्स दर घटकर 12.5% हो गयी है। पहले यह 20 % थी, परन्तु इसमें ‘इंडेक्सेशन’ (महंगाई के अनुसार खरीद मूल्य को एडजस्ट करना) का फायदा मिलता था।
मान लीजिए हमने 3 साल पहले ₹1,00,000 का सोना खरीदा और आज उसे ₹1,50,000 में बेचा।
- कुल मुनाफा: ₹50,000
- टैक्स: ₹50,000 का 12.5% = ₹6,250 (प्लस उपकर/Cess)
धारा 54F के तहत छूट :
यदि आप सोने या चांदी की बिक्री से प्राप्त कुल राशि (Net Consideration) का उपयोग भारत में एक नया आवासीय घर खरीदने या बनाने के लिए करते हैं, तो आप LTCG कर से पूरी तरह बच सकते हैं ।
- निवेश सीमा: नया घर बिक्री की तारीख से 1 वर्ष पहले या 2 वर्ष बाद खरीदा जाना चाहिए, या 3 वर्ष के भीतर बनाया जाना चाहिए ।
- अधिकतम लाभ: वर्ष 2025-26 से, इस धारा के तहत निवेश की ऊपरी सीमा ₹10 करोड़ तय की गई है ।
- आनुपातिक छूट: यदि आप पूरी राशि के बजाय केवल एक हिस्सा घर में निवेश करते हैं, तो छूट आनुपातिक रूप से मिलेगी।
धारा 54EC के तहत छूट
यह धारा अचल संपत्ति (जैसे भूमि या भवन) की बिक्री पर होने वाले लाभ के लिए अधिक लोकप्रिय है, जहाँ लाभ को NHAI या REC जैसे विशिष्ट सरकारी बॉन्ड में निवेश करके कर बचाया जा सकता है । हालांकि, सोने के मामले में धारा 54F को अधिक प्रभावी और सीधा विकल्प माना जाता है ।
निष्कर्ष
सोना चांदी में निवेश, भारतीय परिवारों में सिर्फ परम्परा नहीं है बल्कि भविष्य को आत्मनिर्भर बनाने वाला उत्तम साधन है| बदलती नीतियों के बीच निवेशकों का झुकाव, ETF, SGB, डिजिटल गोल्ड ज्यादा बढ़ा है | जहाँ सोना हमारे पोर्टफोलियो को स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करता है, वहीं चांदी अपनी बढ़ती औद्योगिक मांग के कारण हाई-रिटर्न देने की क्षमता रखती है।