US टैरिफ क्या है | कैसे निर्धारित किया जाता है टैरिफ प्रतिशत |

टैरिफ (Tariff) vs Taxes

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा कई देशों पर लगाये गए ‘टैरिफ‘ की चर्चा हर न्यूज़ हर अखबार में बनी है | Trade War (ट्रेड वार) हो या घरेलु उद्योगों को बचाने की कवायद, टैरिफ ऐसा तरीका जिसे अपनाकर अमेरिका जैसे विकसित देश अपने देश की आर्थिक व्यवस्था में सुधार कर रहे है | परन्तु अधिकतर लोगों के मन में एक ये सवाल जरुर है कि ये टैरिफ है क्या ? ये कैसे आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बना सकता है ?

इस लेख में हम यही जानेंगे कि टैरिफ क्या है, यह किस प्रकार अन्य कर (taxes) से अलग होता है ? कौन-कौन से देश इसका इस्तेमाल करते है और किस प्रकार यह किसी देश की अर्थव्यवस्था में फायदा और नुकसान पहुँचा सकता है ?

टैरिफ (Tariff) क्या होता है?

टैरिफ एक प्रकार का कर या शुल्क है जो आम तौर पर आयतित (Imported) वस्तुओं पर लगाया जाता है | जब कोई देश, वस्तुओं या सेवाओं (services) को दुसरे किसी देश में बेचना चाहता है तो उस देश की सरकार उन वस्तुओं पर टैक्स लगाती है, इस टैक्स को ही टैरिफ कहा जाता है |

उदाहरण : मान लीजिये भारत में बनी एक शर्ट ₹500 बिकती है, वहीं श्रीलंका, भारत में ₹400 में बेचता है | इसलिए श्रीलंका की बनी शर्ट की मांग ज्यादा रहेगी | इस कारण भारतीय उद्योगों को नुकसान पहुचेगा |

अब यदि भारत, श्रीलंका की शर्ट पर 25% टैरिफ लगाता है तो यहां 400+100=500 रुपए बनते है । अब भरा

यह सरकार का सिर्फ कमाई का साधन नहीं है बल्कि इसके जरिये देश में प्रतिस्पर्धा बनती है, घरेलु उद्योगों की रक्षा होती है और आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ जाती है

टैरिफ के कुछ प्रमुख उद्देश्य :

  1. घरेलु उद्योगों की रक्षा : बाहरी देशों से घरेलु उद्योगों का संरक्षण करना, सरकार का सर्वप्रथम उद्देश्य है | बड़े उद्योग तो बाहर के उद्योगों से मिलकर व्यवसाय कर भी लेते है परन्तु नए और छोटे उद्योग के लिए यह मुश्किल होता है | इस कारण, बाहरी वस्तुओं को सरकार महंगा कर देती है |
  2. डंपिंग को रोकना : बड़े देश, छोटे विकासशील देशों में अपना सामान, लागत से भी कम मूल्य पर बेचते है | जिससे वहाँ के बाजार को कम मूल्य की आदत बन जाए | फिर बाद में उस बाजार पर कब्ज़ा जमाया जा सके | इसे ही डंपिंग कहते है |
  3. चीन भी इसी प्रकार से अपना सामान भारत तथा अन्य एशियाई देशों में बेचता है | इसके मुकाबले सरकार उन बाहरी देशों के सामान पर एक प्रकार का टैरिफ लगाती है, जिसे एंटी-डंपिंग ड्यूटी कहते है |
  4. राजस्व (Revenue) बनाना : सरकार को देश के विकास के लिए, इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए निवेश की जरूरत रहती है | इसलिए वह आयात शुल्क लगा कर राजस्व (Revenue) बनाती है |
  5. राष्ट्रीय सुरक्षा : रक्षा क्षेत्र, चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी जरुरी वस्तुओं में निर्भरता, बाहरी देशों पर ना रहे, इसलिए सरकार चाहती है की जरुरी वस्तुएं, देश के भीतर ही निर्मित हो |

टैरिफ के नुकसान :

टैरिफ लगाने से सिर्फ फायदे ही नहीं होते है, उसके कभी-कभी नुकसान भी हो सकते है | जैसे-

  1. वस्तुओं के अधिक दाम : टैरिफ लगने से आयतित वस्तुएं महँगी हो जाती है, इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ता है |
  2. ‘ट्रेड-वार’ : एक देश के विरोध में दूसरा देश भी टैरिफ बढाता है, तो वहां ‘ट्रेड-वार’ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है |
  3. दक्षता की कमी : टैरिफ अधिक लगने से बाहरी कंपनियां देश के भीतर नहीं आ पाती, इस कारण घरेलु उद्योग मनमानी कर सकते है साथ ही बाजार में प्रतिस्पर्धा नहीं रह जाती | जिससे घरेलु उद्योग, वस्तुओं की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान नहीं देते |

टैरिफ के प्रकार :

  1. एड वैलोरम टैरिफ (Ad Valorem Tariff): एड वैलोरम अर्थात ‘मूल्य के अनुसार’ | इसके अंतर्गत आयतित वस्तु के मूल्य पर एक निश्चित प्रतिशत टैरिफ लगाया जाता है |

उदाहरण : यदि एक कंपनी के दो मोबाइल आयतित होते है और मोबाइल पर 20% टैरिफ लगता है तो

  1. मोबाइल की कीमत 10,000 * 20% टैरिफ = 2,000 टैरिफ
  2. मोबाइल की कीमत 50,000 * 20% टैरिफ = 10,000 टैरिफ

महंगाई बढ़ने से सरकार का राजस्व (Revenue) भी बढता है |

2. विशिष्ट टैरिफ (Specific Tariff) : विशिष्ट टैरिफ के अंतर्गत, सामान की मात्रा पर टैरिफ लगता है | सामान की कीमत कितनी भी हो, टैरिफ निश्चित ही रहता है |

उदाहरण : आयात हुए मोबाइल की संख्या 1,00,000 है तो टैरिफ 15% और यदि संख्या 20,00,000 है तो टैरिफ 25% लगेगा |

US टैरिफ और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव :

अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश है | इसलिए जब अमेरिका, टैरिफ बढाता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा ही |

  1. चीन के साथ ‘ट्रेड-वार’ : प्रतिस्पर्धी चीन पर भी टैरिफ का असर हुआ है, इसके बदले में चीन ने भी अमेरिका से आयातित कुछ सेक्टर में टैरिफ बढा दिया है |
  2. अमेरिका उन्नत चिप्स (Chips), इलेक्ट्रिकल गाड़ियाँ (EV) और सौर उर्जा जैसे क्षेत्रों में चीन के दबदबे को खत्म करना चाहता है | इसके अलावा राजस्व (Revenue) बढाना भी अमेरिका का लक्ष्य है |
  3. अमेरिका और चीन जैसे बड़े देशों के टैरिफ बढाने से पूरी विश्व कि आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) गड़बड़ा गयी है | जिससे वस्तुओं के दाम में इजाफा हो रहा है |
  4. इसके अलावा अमेरिका अपने घरेलु उद्योगों पर निर्भर हो रहा है, बजाए बाहरी उद्योगों के |
  5. अमेरिका और चीन जैसे बड़े देशों के टैरिफ बढाने से पूरी विश्व कि आपूर्ति (Supply Chain) गड़बड़ा गयी है | जिससे वस्तुओं के दाम में इजाफा हो रहा है |

कौन-कौन से देश टैरिफ लगाते है ?

  1. अमेरिका : अमेरिका, सबसे ज्यादा आयात करने वाले देशों में से एक है, इसीलिए टैरिफ उसकी कमाई का जरिया है |
  2. चीन : चीन, एशिया यूरोप अफ्रीका अमेरिका समेत सभी देशों में निर्यात करता है, इसलिए उसके घरेलु बाजार में कोई बाहरी हस्तक्षेप करे, वह नहीं चाहता | इसीलिए चीन टैरिफ लगाता है |
  3. भारत : ‘मेक इन इंडिया ‘ के जरिये भारत भी बाहरी उद्योगों को निवेश के लिए आकर्षित करता है और राजस्व (Revenue) वसूलता है |
  4. इसके अलावा यूरोपियन संघ, रूस जैसे विकसित एवं विकाशील राष्ट्र भी टैरिफ लगाते है |

निष्कर्ष :

टैरिफ का इस्तेमाल विश्व का लगभग हर देश करता (अलग-अलग रूप में) है | टैरिफ से स्थानीय स्तर के उद्योग तो पनपते है वही वैश्विक महंगाई भी बढ़ जाती है | परन्तु सही वही है, जो टैरिफ को ट्रेड-वार का हथियार ना बनाये | महंगाई और औद्योगिकी विकास का संतुलन बनाते हुए राष्ट्र विकास करे |

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